कुछ जज्बात ऐसे भी


कुछ जज्बात ऐसे भी 

एक बार की बात है एक गाँव में एक लड़का और एक लड़की रहते थे ,लड़की जो थी वो अति सुशील और सुन्दर थी और लड़का उस लड़की से कुछ कम सुन्दर था, दोनों बचपन से ही साथ में पढ़ते थे लेकिन लड़की थोड़ी अमीर घराने से थी और लड़का गरीब था लेकिन दोनों में बहुत अच्छी बनती थी दोनों में घनिष्ठ मित्रता थी ,लेकिन लड़की के घर वालों को उस लड़के के साथ आना -जाना उठना -बैठना पसंद नहीं था क्यों क्युकी लड़का गरीब घराने का था और लड़की के घर वाले सोचते थे अगर इसके साथ मेरी बेटी रहेगी तो लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे .


दोस्तों समस्या यही है की हम कभी अपनी नहीं सोचते हमेशा दूसरों के बारे में सोचते हैं की लोग क्या कहेंगे कंही लोग मेरे बारे में गलत न सोच ले बस यही बाट उसके माता -पिता भी सोचते थे लेकिन माता -पिता के मना करने पर भी वो नहीं मणि वो उससे मिलती रही और दोनों साथ में पढ़ते थे और घुमने टहलने भी साथ- साथ जाते थे ,दोनों एक दुसरे को बहुत अच्छे से समझते थे जब वह दोनों बड़े हो गये और थोडा ज्यादा समझदार हो गये थे अब दोनों ने अपने -अपने परिवार की जिम्मेदारिया भी सँभालने का भी फैसला कर लिया और जब भी वो किसी गलत राह पर भटकते दोनों एक दूसरे को संभल लेते थे .


हालाकि लड़की की माता -पिता पिता को अच्छे से पता था की वो लड़का कभी कुछ गलत नहीं करेगा उसकी बेटी के साथ फिर भी रोक -टोक करते रहे लेकिन तब भी वो दोनों एक दुसरे से मिलते रहे और दोनों ने खुद का एक छोटा सा बिजनेस स्टार्ट कर दिया और उन्होंने एक छोटी सी होटल खोल ली अपने शहेर के चौराहे पर अब वो दोनों अच्छे  दोस्त ही नहीं बल्कि बिजनेस पाट्नर भी बन चुके थे .

अब पास पड़ोस वाले लोगों का क्या था वो तो बाते बनायेंगे ही आप अच्छा करोगे तो जलेंगे अगर बुरा करोगे तो बदनाम कर देगें वो कभी भी आपका भला नहीं सोचेंगे अब लोगों ने बाते बनाना स्टार्ट कर दिया और पता नहीं क्या -क्या लोग कहते थे जावन लड़की को घर से बाहर भेजते हैं शर्म नहीं आती इनको कल को कुछ हो गया तो क्या करोगे ऐसे ही कुछ लड़की के माता -पिता से लोग कहने लगे थे और उसके बाद एक दिन जब वह लड़की काम से वापस आई तो उसके माता -पिता ने उसे बहुत सुनाया और वो लड़की चुपचाप सुनती रही और उसके बाद लड़की ने अपने माता -पिता से बैठ कर बात की और बोली मै कभी ऐसा कुछ नहीं करुँगी जिससे की आप लोगों को कोई परेशानी हो लेकिन उसके बार बार समझाने पर उसके माता -पिता नहीं समझे और उन्होंने उस लड़के से लड़की को अलग करने का फैसला कर लिया .


लेकिन अब लड़की क्या करती उसके लिए तो उसके माता -पिता और उसका कैरियर दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन इसमे एक बात  अभी और भी थी की उन दोनों को एक साथ रहने की आदत हो गयी थी अब दोनों का अलग -अलग रहना बड़ा मुस्किल था दोनों के लिए दोनों को एक दूसरे से प्यार भी हो गया था कुछ दिनों दूर रहने पर उन दोनों को महसूस हुआ की वो दोनों एक दुसरे के बगैर नहीं रह सकते अब वो दो चार दिनों तक चोरी छुपके एक दुसरे से मिलते रहे फिर एक थी उन दोनों का बिजनेस टॉप पर पहुच चुका था और अचानक एक दिन टी.बी .पर न्यूज आती है और और बिजनेस के सिलसिले में उन दोनों की खूब सराहना की जाती है और जैसे ही वह न्यूज़ उसके मम्मी -पापा देखते हैं ख़ुशी से उछल पड़ते हैं और उसे गले से लगा लेते हैं .

और फिर उस लड़की माता -पिता उस लड़के को घर बुलाते हैं और उसकी बहुत प्रशंसा करते हैं और रिश्ता लेकर उसके घर जाते हैं और उस लड़के के माता -पिता भी मान जाते और दोनों की शादी हो जाती है .तो दोस्तों ये मत देखिये की जमाना क्या कहेगा अगर ऐसा करेंगे तो अरे ये जमाना है ये आपसे तब भी जलेगा जब आप कामयाबी की बुलंदियों पर होंगे और ये तब भी ऊँगली उठाएगा जब आप कुछ नहीं करेंगे ,जब आप कामयाबी के शिखर पर होंगे तो लोग आप के पीछे शाजिसे करेंगे आपकी बुराई करेंगे आपको नीचे गिराने की कोशिस करेंगे .
तो आप ज़माने के हिसाब से न चले तो ही बेहतर होगा आप अपनी तरफ से हमेशा संही रहे और अपने बच्चों को अच्छी  शिक्षा दें अच्छे संस्कार दे तो अच्छा रहेगा उनके लिए भी और आपके लिए भी और एक बच्चे की जिंदगी को बनाने और बिगाड़ने में सबसे बड़ा रोल उसके माता पिता का होता है 

क्युकी एक बच्चे को सबसे ज्यादा जरूरत उसके मम्मी -पापा को होती है 
बच्चों को कभी भी उनकी जिज्मेदारियो से न हटायें उनके ऊपर अपनी आशाएं न थोपे वो आगे क्या करना चाहते हो शिर्फ़ वही जान सकता है 
आपको नहीं पता होता की वो क्या करना चाहते हैं और क्या कर सकते हैं वो तो आपको  उनके करने के बाद ही पता चल पता है की वह क्या बेस्ट कर सकता है इसलिए बच्चे को वही कराये जो उसका मन हो वो तो आपको भी पता नहीं होता की आपका बच्चा बड़ा होकर क्या बनेगा और जिस काम में उसका मन लगेगा वो  बस वही करना चाहेगा और उसी काम को वो कर सकता है इसलिए अपने बच्चों को उचित सिक्षा दें .


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