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देखिये क्या होती है एक लड़की


क्या होती है एक लड़की 

जब कोई बूढा होता है तो बूढ़े का सहारा होती है लड़की 
जब कोई रोता है तो उसे हसाती  है एक लड़की खुद कितनी भी परेशानी में क्यों न हो लेकिन दुसरो की मदद करती है एक लड़की कोई रूठ जाये तो उसे मानाती  हैं कोई थक जाये तो उसके पैर दबाती  है. एक नहीं दो -दो परिवारों को संभालती है है एक लड़की एक नहीं दो परिवारों की लाज रखती है एक लड़की शादी के बाद एक लड़का कभी अपने ससुराल को अपना घर नही मानता ,लेकिन एक लड़की शादी के कुछ दिन बाद ही आती है और कहती है अच्छा चलती हूँ माँ घर बहुत सारा काम है ,देखो कैसे एक ही पल में उसके अपने बदल जाते हैं और अपने ससुराल को ही अपना घर मानने लगती है ,लेकिन फिर भी ससुराल वाले कभी ये नही कहते की ये तुम्हारा घर है ,जब बहू ससुराल जाती है तो सभी यही कहते हैं की ओ अपने घर गयी है ,अपने मायके गयी है ,जबकि अब ओ केवल जन्म देने वाली माँ को ही माँ नही मानती ओ दोनों को अपनी माँ मानती है.

फिर भी ये भेदभाव नही जाता सदियों से चली आ रही इस परम्परा को लोग आज भी निभाते आ रहे हैं अगर कोई लड़की गरीब घर की है और उसके पिता जी दहेज़ में ज्यादा कुछ न दे पाए तो उसके ससुराल वाले ताने देते हैं ससुराल वाले ही क्या उसकी सास तक ये बाट नही समझती की ओ भी किसी की बेटी थी ,कैसे एक पिता अपनी बेटी के लिए उसके जन्म होने से लेकर ही सोचने लगता है की अरे धन इकट्ठा करना है बेटी की शादी करनी है.

और हर एक पिता की यही ख्वाइस होती हैं की ओ अपनी बेटी की शादी धूम -धाम से करे और उसकी बेटी हमेशा खुश रहे आजकल तो लड़कियां इंडिपेंडेंट भी बन रही हैं फिर भी दहेज़ की डिमांड बढती ही जा रही है 
लड़का कुछ करे या ना करे लेकिन अगर शादी करनी है तो दहेज़ देना पड़ेगा 

और शादी के बाद कोई गारंटी नहीं है की उसकी बेटी खुश ही रहेगी लेकिन दहेज चाहिए लड़की एक रिश्ता नही कई रिश्ते निभाती है उसके पास एक जगह की टेंशन नहीं ससुराल और मायका दोनों के बारे में सोचती है 
अगर ससुराल में कुछ हो गया तो उसे टेंसन होगी और अगर मायके में हुयी तो भी टेंसन क्युकी ओ दोनों परिवार को अपना परिवार मानती है 
उसके पास एक रिश्ते नहीं कई रिश्ते होते हैं निभाने के लिए फिर भी ओ सबको खुश रखती है खुद चाहे कितनी भी दुखी क्यों न हो हर हाल में रिश्ते को बड़े ही प्यार से निभाती हैं कोई भी आता है उसकी निस्वार्थ भाव से सेवा करती हैं इतने सारे काम संभालती है फिर भी नहीं थकती और आप लोग उसी को नहीं समझ पाते परिवार सकुशल चलने में एक लड़की या पत्नी का बहुत बड़ा योगदान होता है 


इसीलिए हमे उनकी इज्जत करनी चाहिए कभी -कभी उनकी भी सुन लेनी चाहिए क्युकी उन्हें रिश्तों का अनुभव आप से ज्यादा होता है अगर अनुभव न होता तो एक परिवार को छोड़कर दुसरे परिवार को अपना परिवार कभी नहीं मानती एक लड़की आपके लिए कितना कुछ करती है और आप लोग उससे इज्जत से बात तक नहीं करते उसे समझने की कोशिस नहीं करते उसे ताने देते हैं.
ये तो गलत बात है उसे कुछ मिले या न मिले उसके परिवार का प्यार ही काफी होता है उसके लिए और आप लोग अगर कुछ नहीं कर सकते तो कम-कम एक लड़की की मजबूरी को समझने की कोशिस तो कर ही सकते हीं अगर उसकी प्रॉब्लम खुद महसूस करके देखेंगे तो समझ आएगी उस लड़की की मजबूरी जो रात दिन ताने सुनती है इतना कुछ करने के बावजूद भी ओ  ये सब सहती है.

ओ कभी नहीं चाहती की ओ किसी पर बोझ बने उसके माँ -पापा कर्ज में डूब जाये ऐसा एक बेटी कभी नहीं सोच सकती इसीलिए आप सुधरेंगे तभी दूसरे आपकी बात को सुनेंगे ओ कहते नहीं की आप भले तो जग भला ,हम सुधरेंगे जग सुधरेगा और फिर एक बेटी भी खुल कर अपनी जिंदगी जी पायेगी