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गरीब किसान और उसका परिवार

गरीब किसान और उसका परिवार 

एक गाँव में एक किसान रहता था वो बहुत ही गरीब था लेकिन वो गरीब 
सिर्फ धन से था क्युकी उसके यंहा रोने वाला कोई नही था उसकी पत्नी बहुत ही सीधी -साधी एवं नेक स्वाभाव की थी हमेशा मुस्कुराती रहती थी पति बाहर से कमा कर लाता और वो अपना घर बार संभालती थी उसके एक दस साल की एक बेटी भी थी और एक बूढी माँ वो किसान की पत्नी उसकी माँ का बहुत ख्याल रखती थी 


कभी उसे कोई दिक्कत नही होने दी और उसकी लड़की भी कभी सुंदर और होशियार थी एक बार किसान बाहर काम करने जाता है और पत्नी घर के सारे काम जल्दी ही करके बूढी माँ के पास बैठ जाती है और ढेरों बाते करती है उसके बाद रात का भोजन बनती है और उसका पति भी काम से वापस आ जाता है सबको साथ में बिठा कर खाना खिलाती है और फिर सबका बिस्तर लगाती है और सब सो जाते हैं उसका पति भी सोने लगता है क्युकी बहुत थका हुआ होता है 


अब उसके नींद नहीं पड़ती है तो वो अपने पति को हाथ लगाकर बोलती है की क्या आप सोने लगे हमे नींद नहीं आ रही है पति बोलता है ह बहुत थका हुआ हूँ हमे सो जाने दो सुबह फिर से काम पर जाना है और पत्नी का हाथ अपने ऊपर से हटा देता है वो अकेली बैठी पता नहीं क्या -क्या सोचती है और फिर अचानक से उसके सिने में दर्द होता है बहुत जोरो का और वो चिल्ला भी नहीं पाती है तब तक उसकी जान निकल जाती है


अब किसान और उसकी बेटी और माँ जब सब उठते हैं और देखते हैं की वो अभी भी लेती हुयी है तो सभी कहते हैं रोज तो सबसे पहले उठ जाती है आज क्या हो गया अभी भी सो रही है तो किसान बोलता है रात में सो नहीं पाई है ढंग से बोल रही थी नींद नहीं आ रही है इसीलिए शायद सो रही है और फिर माँ बोलती है जगाना नहीं सोने दो तब किसान खाना बनाने को अपनी बेटी से बोलता है लड़की ज्यादा कुछ तो नहीं बना पाती है लेकिन बना लेती हैं उसने उल्टा सीधा खाना बनाया और रोटियाँ जला दी फिर अपने पापा का लंच बॉक्स पैक कर  देती है और किसान चला जाता है 


तब वो अपने माँ के पास जाती है और बोलती है की माँ -माँ सुनो माँ कितना सोवोगी आज खाना हमे बनाना पड़ा सारी रोटियाँ जल गयी एक भी आची नहीं बना पायी वो माँ का हाथ पकडती है और हाथ गिर जाता है तब तक बूढी माँ भी आ जाती है और कहती ही उठो बहू कितना सोवोगी और वो भी हिलाने लगती है तो देखती है की बहू तो अब नहीं रही तब जोर -जोर से रोना शुरू कर देती है और लड़की से कहती है की माँ नहीं रही वो भी बहुत रोटी है तब तक मोहल्ले के बहुत सरे लोग आ जाते है और जब किसान आता है तो उसकी तो जैसे सुध -बुध ही खो जाती है 


और सोचता है की काश मै कल रात जग गया होता तो मेरी पत्नी नहीं जाती वो खुद को कोशाने लगता है उसका अंतिम संस्कार हो जाता है और अब वही हसता खेलता घर शमशान लगने लगता है बूढी माँ उधर पड़ी रोया करती है और बेटी भी शादी करने वाली  हो जाती है वो भी बहुत गुम शुम सी रहने लगती है न कभी हसना न बोलना हमेशा उदास रहती है अब किसान बेचारा अकेला क्या क्या करता वो खुद को कोसते -कोसते पता नहीं जो जमा पूंजी बची हुयी थी उसी से बिटिया की शादी कर देता है और वो अपने घर चली जाती हैं उसकी माँ भी बहुत बूढी हो चुकी थी कुछ समय बाद वो भी चल बसी 


अब अकेला किसान बचा था क्या कर  लेता गाँव वाले बोले शादी कर लो लेकिन इस उम्र में भला कों शादी करता उससे और वो बेचारा काम भी छोड़ दिया और अब शराब पीता था जन्हा भी मिल जाये पी  लेता था और इधर -उधर पड़ा रहता था एक दिन बहुत परेशान हुआ और सोचा कब तक ऐसा चलेगा अब तो अपना कोई रहा नहीं मै जी कर क्या करूँगा और फिर वो भी आत्म हत्या कर  लेता है  



तो दोस्तों ये होती है एक औरत के बिना जिन्दगी घर में एक औरत न हो तो मेहमान पडोशी लड़कियां  सब आना बंद कर देते हैं औरत घर की रौनक होती है चाहे जैसी भी हो अगर कोई गलती हो जाये तो आपस में समझा बुझा लीजिये उसे समझाइये लेकिन उसकी इज्जत कीजिये क्युकी हम सब एक दूसरे के बिना अधूरे हैं