एक नई शुरुवात करते हैं






एक नई शुरुवात करते हैं (कविता)
चल जिंदगी!
 एक शुरुवात करते हैं 
जो उम्मीद दूसरों से की थी 
उसे आज पूरी खुद से करते हैं 

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चल जिंदगी एक नई शुरुवात करते हैं 
तो कभी किसी ने बेगाना 
चल आज खुद को अपनाते हैं 

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चल जिंदगी !
एक नई शुरुवात करते हैं
 कभी किसी ने गिराया 
तो कभी किसी ने उठाया 

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चल खुद को आज उस काबिल बनाते हैं 
चल आज सबको हँसना सिखाते हैं  
चल ज़िन्दगी एक नई शुरुवात करते हैं 

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ये लोग तो आने जाने हैं 
दुनिया के खेल निराले हैं 
इन निराले खेलों में
 एक खेल अपना बनाते हैं 

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जो उम्मीद दूसरों से करते हैं 
आज खुद करके दिखाते हैं 

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चल जिंदगी!
 एक नई शुरुवात करते हैं 
कुछ रोतों को हसातें हैं 
कुछ गरीबों को अपनाते हैं
कुछ बुजर्गों के साथ समय बितातें हैं 

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जो उम्मीद हम दूसरों से करते हैं 
चल आज खुद ही पूरी करतें हैं 
चल जिंदगी आज नई शुरुवात करतें हैं 

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सबको गले लगातें हैं 
चल सबका दिल बहलाते हैं 
दूसरों की अच्छाइयों से सीख -सीख 
खुद को और अच्छा बनाते हैं

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चल जिंदगी !
एक नई शुरुवात करते हैं  
जो उम्मीद हम दूसरों से करते हैं
 वही उम्मीद खुद से करते हैं 

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चल जिंदगी!
एक नई शुरुवात करते हैं 
जो गलतियां हमने की
 उसे आज खुद से सुधारतें हैं 

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जो उम्मीद हम औरों से करतें हैं 
 आज खुद ही उसे पूरी करतें हैं 

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चल जिंदगी!
 एक शुरुवात करते हैं |