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सोचा न था


poem
poem (socha na tha )

उन हसीं खेल - ठहाकों में ,
बहके- बहके जज्बातों में ,
दिल के राज बताने वाली,
 कुछ लम्बी -लम्बी रातों में 
यूँ मोहब्बत बयाँ हो जाएगी ,
तीन चंद अल्फाजों में ,
सोचा न था .....सोचा न था ....💕

****

दो चार पलों की मुलाकातों में ,
यूँ बहकी- बहकी बातों में ,
हर पल हर लम्हे बनती रहती ,
प्यारी -प्यारी सी यादों में 
तुमसे बेपनाह मोहब्बत हो जाएगी,
सोचा न था ..सोचा न था ..💕

****

उस बारिश के पानी में ,
वो तेज दोपहरी की गर्मी में ,
वो छत की ताका झांकी में ,
उन अनकही सी नज़रों में ,
तुमसे मोहब्बत हो जाएगी ,
सोचा न था ..सोचा न था ..💕

****

वो एक गिलास पानी में ,
तेरी वो मीठी बानी  में ,
दिल तार -तार हो जायेगा ,
यूँ बेशुमार हो जायेगा ,
हमे तुमसे प्यार हो जायेगा ,
सोचा न था ...सोचा न था.. 💕

सोचा न था की वो भी हमारे होंगे ,
जो कल लगते थे गैर से ,
आज वही जान से प्यारे होंगें ,
💕💕💕
***
#poetrybysandhya