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GAJAL (AASMAAN ME UDNE WALE MITTI ME MIL JAYEGA )


GAJAL 

 आसमान में उड़ने वाले मिट्टी में मिल जायेगा 

चढ़ता सूरज धीरे -धीरे ढलता है ढल जायेगा 

तू यंहा मुशाफिर है बाकी सब पानी है 

चार दिन की ये बन्दे तेरी जिंदगानी है!!



खाली हाथ आया है ,खाली हाथ जायेगा 

धन दौलत और माल खजाना यही पर रह जायेगा 

जान कर भी अनजान बन रहा है दीवाने 

अपनी इस जवानी पर तू लगा है इठलाने |



इस तरह तू रोया है इस जंहा के मेले में 

उस खुदा को भुला है दुनियां के झमेले में 

धन जमीन जर जेवर कुछ न हाथ आएगा 

मुट्ठी बाँध आया था खाली हाथ जायेगा|


 

दुनियां के रिवाजों पर ऐतबार करता है 

जिंदगी नहीं समझा जिंदगी भर रोता है 

मिटने वाली दुनियां में उलझा -उलझा फिरता है 

क्या पता की तू यंहा पर किससे प्यार करता है |



यूँ लगा है इठलाने दुनियां को न समझा है

 पाने वाला भी यंहा पर कुछ न कुछ  खोता है 

आसमान में उड़ने वाले मिट्टी में मिल जायेगा 

चढ़ता सूरज धीरे -धीरे ढलता है ढल जयेगा |



अपनी -अपनी दुनियां में हर कोई उलझा है 

जिंदगानी की असलियत क्या  है कौन आखिर समझा है 

नींद में सोने वाले तू भी जल्दी ही जग जायेगा 

चढ़ता सूरज धीरे -धीरे ढलता है ढल जायेगा 

आसमान में उड़ने वाले मिट्टी में मिल जायेगा |



मौत ने इस समा को क्या नही दिखा डाला 

अच्छे -खाशे रूस्तम को ख़ाक में मिला डाला 

याद कर  उस बन्दे को जिसके हौसले तो आली थे 

पर जब गया था दुनियां से दोनों हाथ खाली थे |



अब न वो तू  है और न वो तेरा साथी है 

इस जंहा से चल दिए  जो सिर्फ इक मुशाफिर थे 

कल जो तन कर  चलते थे अपनी शान शौकत पर 

सम्मा तक नही जलती अब तो उनकी तुर्बत पर ,



जो यंहा पर आया है सबको लौट जाना है 

मुशाफिरों का यंहा पर कब्र हो ठिकाना है ,



जो बोया है वो कटेगा , एक दिन तू पछतायेगा 

करले बन्दे कर्म सही तू मिट्टी में मिल जायेगा  

सर उठाकर चलने वाले एक दिन धोखा खायेगा 

चढ़ता सूरज धीरे -धीरे ढलता है ढल जायेगा |



मौत सबको आनी है कौन यंहा पर छूटा है 

तू अमर नहीं होगा ये ख्याल झूठा है 

सांस छूटते ही सब साथ छोड़ जायेंगे 

साथ चलने वाले भी साथ नहीं जायेंगे |



भाई बहेन माँ -बाप सब यंहा पर रिश्ते हैं 

कौन जाने कौन यंहा पर कितने दिन फरिस्ते हैं 

तेरे जितने हैं रिश्ते वक़्त का चलन देंगे 

छीन कर सभी कुछ तुमसे  दो ग़ज मात्र कफ़न देंगे |



जिसको अपना कहता है सिर्फ ये तेरे साथी हैं 

कब्र है तेरी मंजिल और सभी बाराती हैं 

लाकर तुमको कब्र तक इस तरह लिटायेंगे 

अपने हाथों से तुझ पर राख- ख़ाक डालेंगें |



तेरी सारी उल्फत को ख़ाक में मिला देंगे 

तेरे चाहने वाले सब तुझे भुला देंगे 

इसलिए मै कहती हूँ खूब सोच ले दिल में 

क्यूँ फ़साये बैठा है खुद इस दलदल में ,



कर गुनाहों से तौबा आओ अब संभल जाएँ 

दम का क्या भरोशा है जाने कब किधर निकल जाये 

मुट्टी बांध के आने वाले हाथ छुड़ा कर जायेगा |



धन दौलत और माल खजाने से क्या पाया, क्या पायेगा 

चढ़ता सूरज धीरे -धीरे ढलता हैं ढल जायेगा 

आसमान में उड़ने वाले मिटटी में मिल जायेगा |



जिन्दगी हकीकत में क्या है कौन समझा है 

आज समझ ले कल ये मौका हाथ न तेरे आएगा 

नींद में चलने वाले एक दिन मिट्टी में मिल जायेगा 

चढ़ता सूरज धीरे -धीरे ढलता है ढल जायेगा 

आसमान में उड़ने वाले मिटटी में मिल जायेगा .